
रायपुर। वित्तीय बाजारों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के बीच भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने कहा है कि SEBI के दायरे में आने वाली संस्थाएं अपने द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले AI और मशीन लर्निंग टूल्स के लिए पूरी तरह जिम्मेदार रहेंगी।
23वें FICCI Capital Markets Conference (CAPAM 2026) को संबोधित करते हुए पांडे ने कहा कि किसी भी SEBI-विनियमित संस्था द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले AI या मशीन लर्निंग टूल की जिम्मेदारी उसी संस्था की होगी, चाहे वह टूल खुद विकसित किया गया हो या किसी तीसरे पक्ष से लिया गया हो।
उन्होंने कहा, “AI और तकनीक के साथ, प्रत्येक SEBI-विनियमित संस्था अपने द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले किसी भी AI या मशीन लर्निंग टूल के लिए पूरी तरह जिम्मेदार रहती है, चाहे वह इन-हाउस विकसित किया गया हो या किसी तीसरे पक्ष से लिया गया हो।”
पांडे ने बताया कि SEBI मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर इंस्टीट्यूशंस (MIIs) के लिए एक IT Resilience Index शुरू करने की संभावना पर भी विचार कर रहा है। इसका उद्देश्य महत्वपूर्ण आईटी प्रणालियों की मजबूती और संकट के समय उनकी कार्यक्षमता का आकलन करने के लिए एक वस्तुनिष्ठ ढांचा उपलब्ध कराना है।
उन्होंने कहा, “हम मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर इंस्टीट्यूशंस के लिए IT Resilience Index की संभावना पर विचार कर रहे हैं, ताकि महत्वपूर्ण प्रणालियों की मजबूती का आकलन करने के लिए एक वस्तुनिष्ठ ढांचा उपलब्ध कराया जा सके।”
SEBI चेयरमैन ने कहा कि भारत के विकास के अगले चरण में निवेश के अवसरों को व्यापक बनाने, वित्तपोषण के माध्यमों को मजबूत करने और नियमन को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बनाने के लिए तकनीक का समझदारी से इस्तेमाल जरूरी होगा।
उन्होंने कहा कि SEBI का नियामकीय दृष्टिकोण अनुपातिक और भविष्य को ध्यान में रखने वाले नियमन पर आधारित है, ताकि निवेशकों की सुरक्षा और बाजार की विश्वसनीयता से समझौता किए बिना वित्तीय बाजारों के विकास को समर्थन दिया जा सके।
पांडे ने भारत में वित्तीयकरण को और अधिक व्यापक तथा गहरा बनाने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि म्यूचुअल फंड और सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) ने अधिक भारतीय परिवारों को बाजार से जुड़े निवेशों से जोड़ा है और घरेलू बाजार की मजबूती बढ़ाई है।
हालांकि, उन्होंने कहा कि पूंजी बाजारों में लोगों की भागीदारी बढ़ाने की अभी काफी गुंजाइश है।
पांडे ने कहा कि भारत के पूंजी बाजारों में पिछले वर्षों में बड़ा बदलाव आया है और अब वे केवल आर्थिक गतिविधियों के संकेतक नहीं रह गए हैं, बल्कि स्वयं आर्थिक विकास को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि बढ़ती अर्थव्यवस्था नए निवेश अवसर पैदा करेगी। ऐसे में भारत को ऐसे वित्तीय बाजार तैयार करने होंगे जो अधिक गहरे और नवोन्मेषी हों तथा साथ ही निष्पक्ष, सुरक्षित और भरोसेमंद भी बने रहें।
उन्होंने कहा कि मौजूदा समय की प्रमुख चुनौती यह है कि ऐसे बाजार कैसे विकसित किए जाएं जो अधिक गहरे और नवोन्मेषी होने के साथ-साथ निष्पक्ष, सुरक्षित और विश्वसनीय भी हों।